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मोरादाबाद/भोपाल, 16 मई 2025: ऑपरेशन सिंदूर में शामिल सैन्य अधिकारियों की जाति और धर्म को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव और मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की टिप्पणियों ने देश भर में विवाद खड़ा कर दिया है। इन बयानों को सेना के शौर्य को जाति और धर्म से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिसके चलते दोनों नेताओं की कड़ी निंदा हो रही है।
प्रोफेसर रामगोपाल यादव का विवाद
15 मई 2025 को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए विंग कमांडर व्योमिका सिंह को हरियाणा की जाटव, एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती को पूर्णिया के यादव, और कर्नल सोफिया कुरैशी को मुस्लिम बताया। उन्होंने इन अधिकारियों को 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) श्रेणी में रखते हुए दावा किया कि यह ऑपरेशन पीडीए समूह ने लड़ा। यादव ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर ऑपरेशन का श्रेय लेने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या लड़ने वाले बीजेपी के लोग थे। उन्होंने यह भी कहा कि एक बीजेपी मंत्री ने कर्नल सोफिया कुरैशी को उनके मुस्लिम होने के कारण अपमानित किया, और अगर व्योमिका सिंह और अवधेश कुमार भारती की जाति पता होती, तो उन्हें भी अपमान का सामना करना पड़ता।
आलोचना के बाद, यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनका इशारा उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव की मानसिकता की ओर था, जहां लोग झूठे मामलों, एनकाउंटर, संपत्ति जब्ती, और पक्षपातपूर्ण नियुक्तियों का सामना करते हैं। हालांकि, वह अपने शुरुआती दावों पर कायम रहे, जिससे सवाल उठे कि क्या वह स्वयं सेना को जाति के आधार पर विभाजित करने में योगदान दे रहे हैं।
विजय शाह की आपत्तिजनक टिप्पणी
मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह भी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए आलोचना का सामना कर रहे हैं। 12 मई 2025 को मध्य प्रदेश के महू के रायकोंडा गांव में एक कार्यक्रम में, शाह ने कथित तौर पर कुरैशी को उन लोगों की "बहन" बताया, जो "हमारी बेटियों का सिंदूर बर्बाद करते हैं," जिससे उनका इशारा आतंकवादियों की ओर था। यह बयान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्रवाइयों की प्रशंसा करते हुए दिया।
इसके बाद कई घटनाएं सामने आईं। 13 मई को दोपहर 2:30 बजे शाह ने एक माफी जारी की, जिसे अस्वाभाविक माना गया, इसके बाद एक और माफी दी। उसी दिन शाम 4:30 बजे बीजेपी हाईकमान ने उन्हें तलब किया और बाद में राज्य अध्यक्ष के बंगले पर उनकी फटकार लगाई गई। 14 मई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शाह के बयान का स्वत: संज्ञान लिया और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। शाह ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की, जहां सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाई कोर्ट वापस भेजा और अपनी टिप्पणियों के लिए माफी मांगने का निर्देश दिया (NDTV)। एफआईआर की "हल्की" प्रकृति को लेकर भी आलोचना हुई है। 15 मई को इस्तीफे की मांग और विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, शाह ने पद नहीं छोड़ा।
विजय शाह खंडवा जिले के हरसूद निर्वाचन क्षेत्र से आठ बार के विधायक हैं और वर्तमान राज्य सरकार में आदिवासी मामलों जैसे विभागों के मंत्री हैं। वह निमाड़ क्षेत्र में एक प्रमुख आदिवासी नेता माने जाते हैं और पहले भी कई सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। यह पहली बार नहीं है जब वह आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए विवादों में घिरे हैं; इससे पहले उन्होंने राहुल गांधी, विद्या बालन, और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह के बारे में विवादास्पद टिप्पणियां की थीं।
राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रियाएं
दोनों नेताओं के बयानों की अन्य राजनीतिक हस्तियों ने कड़ी निंदा की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा कि सेना की वर्दी को जातिवादी नजरिए से नहीं देखा जाता, और प्रत्येक सैनिक अपनी राष्ट्रीय ड्यूटी निभाता है, न कि किसी जाति या धर्म का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि एक वीर बेटी को जाति की सीमाओं से बांधना सपा की संकीर्ण सोच को दर्शाता है और यह सेना के शौर्य और राष्ट्र की गरिमा का गंभीर अपमान है (Hindustan Times)। उन्होंने इस मानसिकता को तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति से जोड़ा।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने भी टिप्पणी की कि जब देश पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर एकजुट और गर्वित है, तब सेना को धर्म और जाति के आधार पर आंकना और विभाजित करना अत्यंत अनुचित है। उन्होंने कहा कि बीजेपी मंत्री की गलती को एक वरिष्ठ सपा नेता द्वारा दोहराना शर्मनाक और निंदनीय है (Organiser)।
ऑपरेशन सिंदूर का प्रतीकात्मक महत्व
ऑपरेशन सिंदूर के बाद विंग कमांडर व्योमिका सिंह (अंग्रेजी में) और कर्नल सोफिया कुरैशी (हिंदी में) द्वारा दी गई प्रारंभिक प्रेस ब्रीफिंग को भारत के उस दृष्टिकोण का एक शक्तिशाली प्रतीक माना गया, जहां धर्म भेदभाव को परिभाषित नहीं करता। टिप्पणीकारों का कहना है कि सेना को विभाजित करने वाली ऐसी राजनीतिक टिप्पणियां खेदजनक हैं और सैन्य बलों के एकता और बलिदान के ethos को कमजोर करती हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
ऑपरेशन सिंदूर, जिसे पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा किए गए हमलों के लिए जाना जाता है, ने देश में एकता और गर्व की भावना को बढ़ावा दिया। विंग कमांडर व्योमिका सिंह, कर्नल सोफिया कुरैशी, और विदेश सचिव विक्रम मिस्री द्वारा दी गई प्रेस ब्रीफिंग ने इस ऑपरेशन की सफलता को रेखांकित किया। हालांकि, यादव और शाह की टिप्पणियों ने इस उपलब्धि पर छाया डाल दी है।
प्रोफेसर रामगोपाल यादव की टिप्पणियों का विश्लेषण
यादव के बयानों ने न केवल सैन्य अधिकारियों की जाति और धर्म पर ध्यान केंद्रित किया, बल्कि बीजेपी पर ऑपरेशन का राजनीतिकरण करने का भी आरोप लगाया। उनके दावे कि ऑपरेशन "पीडीए" द्वारा लड़ा गया, ने सेना की एकता और पेशेवरता पर सवाल उठाए। उनके स्पष्टीकरण ने कुछ हद तक संदर्भ प्रदान किया, लेकिन यह व्यापक रूप से स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि कई लोगों ने इसे सेना को सामाजिक-राजनीतिक समूहों में विभाजित करने का प्रयास माना।
विवरण | प्रोफेसर रामगोपाल यादव |
|---|---|
तारीख | 15 मई 2025 |
स्थान | मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश |
टिप्पणी | सैन्य अधिकारियों को पीडीए के रूप में वर्गीकृत किया; बीजेपी पर श्रेय लेने का आरोप |
प्रतिक्रिया | एक्स पर स्पष्टीकरण; आलोचना बरकरार |
विजय शाह की टिप्पणियों और कानूनी कार्रवाई
विजय शाह की टिप्पणियां, जो कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों से जोड़ती थीं, को व्यापक रूप से सांप्रदायिक और अपमानजनक माना गया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने तुरंत कार्रवाई की, और सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज करते हुए माफी की मांग की। शाह की माफी के बावजूद, उनके इस्तीफे की मांग जारी है, और यह मामला उनके राजनीतिक करियर पर प्रभाव डाल सकता है।
विवरण | विजय शाह |
|---|---|
तारीख | 12 मई 2025 |
स्थान | रायकोंडा, महू, मध्य प्रदेश |
टिप्पणी | कर्नल सोफिया कुरैशी को आतंकवादियों की "बहन" कहा |
कानूनी कार्रवाई | हाई कोर्ट ने एफआईआर का आदेश दिया; सुप्रीम कोर्ट ने माफी का निर्देश दिया |
प्रतिक्रिया | दो माफियां; बीजेपी हाईकमान द्वारा फटकार |
व्यापक प्रभाव
इन टिप्पणियों ने सेना की एकता और तटस्थता पर सवाल उठाए हैं, जो भारत की ताकत और विविधता का प्रतीक है। राजनीतिक नेताओं की निंदा और कानूनी कार्रवाइयां इस बात को रेखांकित करती हैं कि सैन्य बलों को राजनीतिक या सामाजिक विभाजनों में घसीटना अस्वीकार्य है। यह विवाद भविष्य में ऐसी टिप्पणियों के लिए अधिक जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है।

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