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नक्सलवाद पर कड़ा प्रहार: छत्तीसगढ़ मुठभेड़ में बासवराजू ढेर, भारत को 2026 तक नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम


नक्सलवाद को करारा झटका: छत्तीसगढ़ में शीर्ष नेता बासवराजू ढेर, 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का लक्ष्य


छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के खिलाफ एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा की सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई मुठभेड़ में नक्सलियों के शीर्ष नेता नंबाला केशव राव, उर्फ बासवराजू, सहित लगभग 26-27 अन्य नक्सलियों को मार गिराया गया है। इस ऑपरेशन को नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है, जो भारत को नक्सल-मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बासवराजू, जो सीपीआई (माओवादी) के महासचिव और सुप्रीम कमांडर थे, पहले इसके सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के प्रमुख रह चुके थे। उनके सिर पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम था। वह पिछले कुछ दशकों की सबसे क्रूर नक्सली हमलों के मास्टरमाइंड थे। इनमें 2010 में सीआरपीएफ काफिले पर हमला, जिसमें 70 से अधिक जवान शहीद हुए थे, 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेस नेताओं पर हमला, जिसमें 27 लोगों की मौत हुई थी, और 2003 में तत्कालीन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू पर बम विस्फोट का प्रयास शामिल है। बासवराजू सैन्य रणनीति और गुरिल्ला युद्ध में माहिर थे और अपनी क्रूर रणनीतियों, जैसे शहीद जवानों के शवों में बम लगाने के लिए कुख्यात थे। तीन साल पहले उन्होंने गणपति से नेतृत्व संभाला था और नक्सलियों की कमजोर होती ताकत के बावजूद रणनीतियों को अनुकूलित किया था।


🔍 नक्सलवाद के खात्मे के लिए जरूरी कदम:

  1. स्थानीय युवाओं को शिक्षा और रोजगार देना

  2. आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाएं पहुँचाना

  3. सूचना तंत्र को मजबूत करना

  4. सामाजिक विश्वास का निर्माण करना



यह मुठभेड़ ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट का हिस्सा है, जो नक्सलवाद के खिलाफ तेज अभियान का एक हिस्सा है। पिछले डेढ़ महीने में लगभग 50 नक्सली मारे गए हैं, जबकि 2025 के पहले चार महीनों में 197 कट्टर नक्सलियों को ढेर किया गया है। इस ऑपरेशन में 54 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 84 ने आत्मसमर्पण किया है। मुठभेड़ में भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए हैं।

🗣️ जनता की प्रतिक्रिया

इस खबर के बाद पूरे देशभर में सुरक्षा बलों की सराहना हो रही है। सोशल मीडिया पर #NaxalFreeIndia और #BasavarajuKilled जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। शहीदों के परिवारों को भी इस खबर से संतोष मिला है कि उनके बलिदान व्यर्थ नहीं गए।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने 31 मार्च, 2026 तक भारत को नक्सल-मुक्त बनाने का स्पष्ट लक्ष्य रखा है। गृह मंत्री अमित शाह ने X पर कहा कि तीन दशकों में पहली बार महासचिव स्तर के नक्सली नेता को मार गिराया गया है। यह अभियान इस लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


छत्तीसगढ़ के घने जंगलों में फैले नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में भारत ने एक बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में नारायणपुर, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिलों की सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में देश के सबसे वांछित नक्सली नेता नंबाला केशव राव उर्फ बासवराजू को मार गिराया गया। इस ऑपरेशन में करीब 26 से 27 नक्सलियों के मारे जाने की खबर है।


सफलता के प्रमुख कारक:

1. तेज अभियान: 2019-2020 से नक्सल-विरोधी अभियानों में तेजी आई है, खासकर महाराष्ट्र और तेलंगाना सीमाओं के पास नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में।

2. उन्नत खुफिया और तकनीक: ड्रोन, सैटेलाइट और बेहतर संचार प्रणालियों के साथ खुफिया जानकारी संग्रह में सुधार हुआ है।

3. विकास और विश्वास निर्माण: प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण, मोबाइल टावर स्थापना और बुनियादी सुविधाएं प्रदान करके स्थानीय आदिवासी आबादी का विश्वास जीता जा रहा है। इससे नक्सली प्रचार का प्रभाव कम हुआ है।

4. वित्तीय स्रोतों पर रोक: FCRA (विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम) में संशोधन सहित उपायों से नक्सलियों के घरेलू और विदेशी वित्तीय स्रोतों को काटा गया है।

5. समन्वय और स्थानीय बल: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CRPF, BSF, ITBP, CoBRA) और छत्तीसगढ़ पुलिस व डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के बीच मजबूत समन्वय है। स्थानीय लोगों से बनी DRG ग्रामीणों के साथ बेहतर संचार और विश्वास के कारण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

6.आत्मसमर्पण नीति: सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत हजारों नक्सलियों ने विभिन्न राज्यों में आत्मसमर्पण किया है। नक्सलियों से मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की गई है, साथ ही चेतावनी दी गई है कि इनकार करने पर बासवराजू जैसा हश्र हो सकता है।




🎯 भारत का लक्ष्य: 2026 तक नक्सल-मुक्त राष्ट्र

भारत सरकार ने वर्ष 2026 तक देश को पूरी तरह से नक्सलवाद से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत इंटेलिजेंस, टेक्नोलॉजी और सामुदायिक विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। बासवराजू जैसे शीर्ष नेताओं का खात्मा इस दिशा में एक मील का पत्थर है।



इन प्रयासों से नक्सलवाद का भौगोलिक प्रभाव काफी कम हुआ है। 2014 में 35 जिले नक्सलवाद से सबसे अधिक प्रभावित थे, जो 2025 में घटकर मात्र छह रह गए हैं। कुल नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 18 हो गई है।


🧠 कौन था बासवराजू?

बासवराजू नक्सलियों की केंद्रीय कमेटी का सदस्य और सैन्य रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी या मौत के लिए सरकार ने भारी इनाम घोषित किया था। वर्षों से वह जंगलों में छिपकर भारत सरकार और सुरक्षाबलों के खिलाफ हिंसक गतिविधियों को अंजाम देता रहा था।



मार्च 2026 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन वर्तमान गति को देखते हुए कुछ विशेषज्ञ इसे प्राप्त करने योग्य मानते हैं। बासवराजू जैसे शीर्ष नेता का खात्मा नक्सली नेतृत्व संरचना को गहरा नुकसान पहुंचाता है और उनकी बड़े हमलों की योजना बनाने की क्षमता को कमजोर करता है। हालांकि, हिडमा और गणपति जैसे अन्य शीर्ष नेता अभी भी फरार हैं, जिसके लिए अगले महीने और बड़े ऑपरेशन की उम्मीद है।



🪖 ऑपरेशन की सफलता: कैसे चला अभियान?

सुरक्षा एजेंसियों को गुप्त सूचना मिली थी कि नक्सलियों का एक बड़ा दल इन इलाकों में मूवमेंट कर रहा है। इसके बाद CRPF, कोबरा कमांडो, और राज्य पुलिस बलों ने संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। यह मुठभेड़ घंटों चली, जिसमें अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल हुआ। अंततः सुरक्षाबलों को भारी सफलता मिली और नक्सली दल छिन्न-भिन्न हो गया।

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